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Bihar Monsoon Session 2026 News: 21 साल बाद सदन में नहीं दिखेंगे नीतीश कुमार, तेजस्वी की गैरमौजूदगी में शुरू हुआ मानसून सत्र

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Alam Ki Khabar: बिहार विधानमंडल का मानसून सत्र कई राजनीतिक बदलावों के बीच शुरू हुआ। 21 वर्षों बाद नीतीश कुमार सदन में मौजूद नहीं हैं, जबकि तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी में विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है।

पटना, 20 जुलाई। आलम की खबर: बिहार विधानमंडल का पांच दिवसीय मानसून सत्र सोमवार से ऐसे राजनीतिक माहौल में शुरू हुआ, जिसने राज्य की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ दिया। इस बार का सत्र केवल सरकार और विपक्ष के बीच होने वाली बहसों के कारण ही चर्चा में नहीं है, बल्कि दो बड़े राजनीतिक चेहरों की गैरमौजूदगी भी पूरे सत्र का प्रमुख विषय बन गई है। करीब 21 वर्षों बाद ऐसा अवसर आया है जब बिहार के किसी भी सदन में मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार मौजूद नहीं हैं। वहीं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति ने विपक्ष की रणनीति और एकजुटता को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

लंबे समय तक बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे नीतीश कुमार पिछले बजट सत्र तक मुख्यमंत्री के रूप में विधानसभा में सक्रिय भूमिका निभाते रहे। अब राज्यसभा सदस्य बनने के बाद वह विधानसभा और विधान परिषद, दोनों सदनों का हिस्सा नहीं हैं। ऐसे में पहली बार सत्ता पक्ष को सदन के भीतर उनके बिना अपनी रणनीति के साथ आगे बढ़ना होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार की अनुपस्थिति विधानसभा की कार्यशैली और बहस के स्वरूप में बदलाव ला सकती है।

दूसरी ओर महागठबंधन के सामने भी चुनौती कम नहीं है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी के कारण विपक्ष की साझा रणनीति समय पर तैयार नहीं हो सकी। राजद, कांग्रेस और वाम दलों के बीच समन्वय की प्रक्रिया अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी। राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की खराब तबीयत भी पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों को प्रभावित करने वाला एक बड़ा कारण मानी जा रही है।

हालांकि विपक्ष ने स्पष्ट किया है कि वह सरकार को कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर घेरेगा। इनमें नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ी, कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, कम बारिश के कारण धान की रोपनी पर संकट, बिजली आपूर्ति, शिक्षक बहाली, बेरोजगारी, पंचायतों में कर व्यवस्था और चर्चित पुलिस कार्रवाई जैसे विषय प्रमुख रहेंगे। विपक्ष का आरोप है कि सरकार जनता से जुड़े मूल मुद्दों पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखा रही है।

वहीं सत्ता पक्ष ने मानसून सत्र के लिए अपनी अलग रणनीति तैयार की है। सरकार अनुपूरक बजट, विकास योजनाओं की प्रगति, आधारभूत संरचना, स्वास्थ्य, शिक्षा और निवेश से जुड़े प्रस्तावों को सदन में रखने की तैयारी में है। सरकार का दावा है कि विपक्ष के हर सवाल का तथ्यों के आधार पर जवाब दिया जाएगा और विकास कार्यों की पूरी जानकारी सदन को दी जाएगी।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मानसून सत्र केवल विधायी कार्यवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले राजनीतिक समीकरणों की दिशा भी तय करेगा। एक ओर सत्ता पक्ष नए नेतृत्व के साथ अपनी कार्यशैली को स्थापित करने की कोशिश करेगा, वहीं विपक्ष अपनी एकजुटता और जनहित के मुद्दों के सहारे सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास करेगा।

पहले दिन से ही जिस तरह राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है, उससे संकेत मिल रहे हैं कि आगामी दिनों में सदन के भीतर तीखी बहस, आरोप-प्रत्यारोप और कई अहम मुद्दों पर जोरदार टकराव देखने को मिल सकता है। ऐसे में पूरे राज्य की नजर इस मानसून सत्र की कार्यवाही पर बनी हुई है।

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